Hindi
Thursday 2nd of July 2020
Kalam and Beliefs
ارسال پرسش جدید

रहबर हुसैन हैं

रहबर हुसैन हैं
भटकी हुई हयात के रहबर हुसैन हैंसेहरा हैं करबला तो समन्दर हुसैन हैंखुशबू पयामे हक की हैं सारे जहान मेंगुलज़ार-ए-मुस्तफा के गुल-ए-तर हुसैन हैंइश्क-ए-हुसैन से मेरी उक़बा संवर ...

इन्सानी जीवन में धर्म की वास्तविक्ता

इन्सानी जीवन में धर्म की वास्तविक्ता
हमने पहले सबक़ में पढ़ा कि अगर हम ख़ुदा के भेजे हुए दीन और उस के ज़रिये बनाये गये उसूल और क़ानून का पालन करें तो दुनिया व आख़िरत में सौभाग्य प्राप्त कर सकते हैं। सिर्फ़ वह ...

पारिभाषा में शिया किसे कहते हैं।

पारिभाषा में शिया किसे कहते हैं।
 अमीरुल मोमिनीन हज़रत अली अलैहिस्सलाम की बिला फ़स्ल इमामत (अर्थात रसूले इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहे व आलिही वसल्लम के बाद, बिना किसी फ़ासले के आपको पहले नम्बर पर उनका ...

क़यामत पर आस्था का महत्व

क़यामत पर आस्था का महत्व
कार्यक्रम सृष्टि ईश्वर और धर्म को हमने सृष्टि पर चर्चा से आरंभ किया था जिसके दौरान हमने विभिन्न ईश्वरीय गुणों तथा उसके दूतों और उनके लाए हुए धर्म परचर्चा की और यह बताया कि ...

क़ुरआन नातिक़ भी है और सामित भी

क़ुरआन नातिक़ भी है और सामित भी
हज़रत अली (अ) एक तरफ़ तो फ़रमाते हैं कि यह किताब नातिक़ है जब कि दूसरे मक़ाम पर फ़रमाते हैं यह किताब सामित है नातिक़ नहीं इस को बोलने पर आमादा करना चाहिये और यह मैं हूँ जो ...

हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम के ज़ुहूर की निशानियाँ

हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम के ज़ुहूर की निशानियाँ
 इमाम महदी अलैहिस्सलाम के ज़ुहूर से पहले बहुत सी निशानियां ज़ाहिर होंगी। जब आपका ज़ुहूर होगा तो पूरब व पश्चिम पर आपकी हुकूमत होगी। ज़मीन अपने सारे ख़ज़ाने उगल देगी। ...

जवानी के बारे में सवाल

जवानी के बारे में सवाल
जवानी और निशात अल्लाह की अज़ीम नेमत है जिसके बारे में क़यामत के रोज़ पूछा जायेगा। पैग़म्बरे इस्लाम (स) से एक हदीस है आप फ़रमाते हैं: क़यामत के दिन कोई शख़्स एक क़दम नही ...

इमाम अली अ.स. एकता के महान प्रतीक

इमाम अली अ.स. एकता के महान प्रतीक
 इमाम अली अ.स. ने यह जानते हुए कि पैग़म्बर स.अ. की वफ़ात के बाद ख़िलाफ़त, इमामत और रहबरी मेरा हक़ है और मुझ से मेरे इस हक़ के छीनने वाले ज़ुल्म कर रहे हैं (शरहे नहजुल-बलाग़ा, ...

सब से बड़ा मोजिज़ा

सब से बड़ा मोजिज़ा
हमारा अक़ीदा है कि क़ुरआने करीम पैग़म्बरे इस्लाम (स.) का सब से बड़ा मोजज़ा है और यह फ़क़त फ़साहत व बलाग़त, शीरीन बयान और मअनी के रसा होने के एतबार से ही नही बल्कि और ...

सुशीलता

सुशीलता
इस्लाम ने बातचीत में एवं व्यवहार में हमेशा अपने अनुयाइयों से नम्रता एवं भद्रता का आहवान किया है और अभद्रता एवं अशिष्टता से रोका है। इस लिए कि इस्लाम की यह शिक्षा जीवन में ...

राह के आख़री माना

राह के आख़री माना
रहरवाने राहे ख़ुदा के सामने सबसे मुश्किल काम “इख़लास ” है और इस राह में सबसे ख़तरनाक मानेअ शिर्क में आलूदगी और “रिया” हैं। यह मशहूर हदीस तमाम रहरवाने राहे ख़ुदा की कमर को ...

ईरान में पैग़म्बरे आज़म-6 मीज़ाइल अभ्यास

ईरान में पैग़म्बरे आज़म-6 मीज़ाइल अभ्यास
इस्लामी गणतंत्र ईरान में इस्लामी क्रान्ति के संरक्षक बल सिपाहे पासदाराने इंक़ेलाब आज सोमवार से फ़ार्स खाड़ी में पैग़म्बरे आज़म-6 नामक मीज़ाइल अभ्यास आरंभ कर रहा ...

सलाह व मशवरा

सलाह व मशवरा
कामों में दूसरों से मशवरा करो।   समाजी तरक़्क़ी का एक पहलू मशवरा करना है। मशवरा यानी मिलकर फ़िक्र करना। इसमें कोई शक नही है कि जो लोग मशवरा करते हैं, उनमें अक़्ल व फ़िक्र ...

अल्लाह की हदों को जारी करना

अल्लाह की हदों को जारी करना
अल्लाह की हदों को जारी करनासमाज के उपद्रवी व बुरे लोगों से मुक़ाबले के लिए विभिन्न तरीक़े अपनाये जाते हैं। हज़रत इमाम महदी (अ. स.) की हुकूमत में बुरे लोगों से मुक़ाबले के लिए ...

पाप या ग़लती का अज्ञानता व सूझबूझ से गहरा संबंध

पाप या ग़लती का अज्ञानता व सूझबूझ से गहरा संबंध
ईश्वरीय दूतों का इस लिए पापों से दूर रहना आवश्यक है क्योंकि यदि वे लोगों को पापों से दूर रहने की सिफारिश करेगें किंतु स्वंय पाप करेंगे तो उनकी बातों का प्रभाव नहीं रहेगा ...

रोज़े आशूरा के आमाल

रोज़े आशूरा के आमाल
रोज़े आशूरा मुहम्मद और आले मुहम्मद (स.अ.) पर मुसीबत का दिन है। आशूर के दिन इमाम हुसैन अ. ने इस्लाम को बचाने के लिए अपना भरा घर और अपने साथियों को ख़ुदा की राह में क़ुर्बान कर ...

हस्त मैथुन जवानी के लिऐ खतरा

हस्त मैथुन जवानी के लिऐ खतरा
आम तौर से यह बात समझी जाती है कि जवानी में केवल लड़के ही हस्त मैथुन (मुश्त ज़नी) जैसा खतरनाक काम करते हैं जब कि यह गलत है क्योंकि इस बात का सुबूत मौजूद है कि हस्त मैथुन ...

हिदायत व रहनुमाई

हिदायत व रहनुमाई
  और मैने तुम्हे नसीहत की मगर तुम नसीहत करने वालों को पसंद नही करते। सूरः ए आराफ़ आयत 78   समाजी ज़िन्दगी, दर अस्ल इंसान का बहुत से नज़रियों व अफ़कार से दो चार होना है। उनमें ...

अपनी परेशानी लोगों से न कहो

अपनी परेशानी लोगों से न कहो
मुफ़ज़्ज़ल बिन क़ैस ज़िन्दगी की दुशवारी से दो चार थे और फ़क्र व तंगदस्ती कर्ज़ और ज़िन्दगी के अख़राजात से बहुत परेशान थ। एक दिन हज़रत इमाम जाफ़रे सादिक अलैहिस्सलाम की ...

क़ुरआन ख़ैरख्वाह और नसीहत करने वाला है

क़ुरआन ख़ैरख्वाह और नसीहत करने वाला है
ईमाम अली (अ.स.) फ़रमाते हैं :लोगों! क़ुरआन के जमा करने वालों और पैरोकारों में से हो जाओ और उस को अपने परवरदिगार के लिये दलील क़रार दो।अल्लाह को उस के कलाम के पहचानों। ...