Hindi
Sunday 24th of September 2017
  • इंतेख़ाबे शहादत

    वाक़ेया ए करबला रज़्म व बज़्म, सोज़ व गुदाज़ के तास्सुरात का मजमूआ नही, बल्कि इंसानी कमालात के जितने पहलु हो सकते हैं और नफ़सानी इम्तियाज़ात के जो भी असरार मुमकिन हैं उन सब का ख़ज़ीनादार है, सानेहा ए करबला तारीख़ का एक दिल ख़राश वाक़ेया ही नही, ज़ुल्म व बरबरियत और ज़िन्दगी की एक ख़ूँ चकाँ दास्तान ही नही, फ़रमाने शाही में दर्ज नंगी ख़्वाहिशों की रुदादे फ़ितना ही नही बल्कि हुर्रियते फ़िक्र, निफ़ाज़े अदल और इंसान के बुनियादी हुक़ूक़ की बहाली की एक अज़ीमुश

  • दारूल इरफ़ान अनुसंधान केंद्र

    शिया दारूल इरफ़ान इल्मी अनुसंधान केंद्र ने सन् 1377 हिजरी शमसी (1998 ई.) मे बुध्दिमान विचारक और रब्बानी विद्वान आदरणीय प्रोफ़सर हुसैन अनसारीयान की देख रेख मे अपनी गतिविधयो का आरम्भ किया। यह सांस्कृतिक और धार्मिक संस्था संघ इस्लामी मार्गदर्शन के मंत्रालय द्वारी जारी अनुमति लाइसंस के आधार पर निम्नलिखित उद्देश्यो के साथ स्थापित हुआ है। गतिविधियो के विषय और लक्ष्य: ईश्वरदूत के कथन (इन्नी तारेकुन फ़ी कुमुस्सक़लैन किताबल्लाहे वा इतरती आहलाबैती …) के प्रावधानो को लागू करने मे और आलूल्लाह स्कूल की आस्थाई (अक़दती) सीमाओ की रक्षा करने मे इस संस्था के विषय और लक्ष्य निम्नलिखित है। 1 पवित्र अहलेबैत (अलैहेमुस्सलाम) की शुध्द सांस्कृति को देश और विदेश मे पहचनवाने का प्रयास करना। 2 लेखो का संकलन और संग्रह एवम ग्रंथो और धार्मिक किताबो का विदेशी भाषाओ मे अनुवाद करना। 3 सांस्कृतिक समारोहो और कला प्रदर्शनीयो और सार्वजनिक अथवा निजि संगठनो और संस्थाओ मे सहयोग करना। 4 कला और सांस्कृतिक वस्तुओ जैसे किताबे, समाचार पत्र, आडियो और वीडीयो टेप एवम कंप्यूटर साफ्टवेयर के रूप मे इस प्रकार की सेवाओ के माध्यम से कलात्मक और सांस्कृतिक आदान प्रदान करना। 5 सांस्कृतिक एवम धार्मिक विरासत की रक्षा हेतु कलात्मक और सांस्कृतिक कृतियो को एकत्रित (इकठ्ठा) करने मे सहायता और प्रयास करना। 6 देश विदेश के धार्मिक, कलात्मिक और सांस्कृतिक संचार केन्द्रो से सम्पर्क एवम वारतालाप (बातचीत) करना। 7 शिया विद्वानो की किताबो और उनकी लिखित धरोहर की बहाली हेतु प्रकाशन के लिए आवश्यक लाइसेंस के साथ प्रकाशन के विभिन्न क्षेत्रो मे गतिविधिया करना। 8 सार्वजनिक और व्यवसायिक पुस्तकालयो एवम धार्मिक कार्यो की आडियो और वीडीयो प्रजनन उत्पादन केंद्रो की स्थापना करना। 9 वैज्ञानिक अनुसंधान और धर्मशास्त्र एवम विज्ञान के क्षेत्र मे सूचना डेटाबेस हेतु एक आनलाइन साइट बनाना। 10 वैचारिक, नैतिक, समाजिक, परिवारिक संदेह का इनटरनेट, टेलीफून, व्यक्तिगत, पत्राचार (लिखित) रूप मे प्रश्नोत्तर केंद्र की स्थापना। 11 देश विदेश मे धर्म के प्रचार और प्रचारको के लिए विशेष प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना। 12 पिछले चार दश्को से देश के सांस्कृतिक और युवाओ के व्यापक स्वागत को देखते हुए आदरणीय प्रोफ़सर हुसैन अनसारीयान की रचनाऔ को एकत्रित, संगठित और प्रकाशित करना, प्रोफ़ेसर के विचारो और भाषणो से प्रभावित पिछले 40 वर्षो से आज तक 50 विषयो पर 80 से अधिक अनमोल संकलनो की प्रतियाँ और 5 हज़ार घंटो से अधिक जोकि 480 से अधिक प्रमुख विषयो विशेष रूप से आस्था के दायरे मे इल्मी और इस्लामी धर्मशास्त्र, चरित्र, नौतिकता, भाषान्तरण (व्याख्या), इसलामी रहस्यवाद, कलाम और सामाजिक कार्यो पर आधारित प्रोफ़ेसर के भाषण इस संस्था द्वारा संगठित एवम प्रकाशित हुए है। दिव्य सफ़लता से इरफ़ान की सूचना डेटाबेस की साइट (WWW.erfan.ir) और अनसारीयान (WWW.ansarian.ir) और इमाम सज्जाद (अ.) डेटाबेस(www.emamsajjad.com) और इसलाम शिया (www.shieh.ir) जो आज विश्व की 28 जीवित भाषाओ मे गतिविधिया कर रही है। प्रोफ़सर अनसारीयान की अधिकांश किताबे एवम 3 हज़ार भाषणो को नामांकित करने के पश्चात जनता के हाथो मे दे दिया है और इन संग्रहो के अलावा धर्मशास्त्र, अहलेबैत (अ.स.) के चरित्र, लेख, और विशेष धार्मिक हज़ारो अक़दती, नैतिक, कलामी, फ़िक़्ही (आदेशी) प्रश्नोत्तर, क़ुरआन, नहजुल बलाग़ा और सहीफ़ए सज्जादिया के धाराप्रवाह और सटीक अनुवाद के अलावा प्रोफ़सर अनसारीयान ने इस धार्मिक साइट के विविध और धार्मिक हिस्सो को धर्मशास्त्र के प्यासो और प्रशंसको को इनटरनेट पर प्रदान किया है। इसी प्रकार विद्वानो, शोधकर्ताऔ और छात्रो को सूचित किया जाता है कि प्रोफ़ेसर अनसारीयान के भाषणो को किताबी शकल (सैरी दर मआरिफ इस्लामी) इस्लामी शिक्षाऔ का सर्वेक्षण के रूप मे शोधकर्ताओ के प्रस्ताव को व्यवहारिक किया है। और शीघ्र ही इस अनमोल संग्रह का पहला भाग संगठित, संपादित और संसाधन निष्कर्षण और धनी पुनश्च अनुसंधान समूह इस्लामी शिक्षाऔ का सर्वेक्षण के विषय पर प्रकाशित होगा। प्रोफ़ेसर के उस्ताद बनाने वाले भाषण शिया प्रमाणित सूत्रो के आधार पर स्थिर है, कि जिन्हे जनता के लिए किताबी रूप मे लाया जायेगा कि जो एक व्यापक सोत्र के रूप मे वक्ताओ और शोधकर्ताओ के लिए उपलब्ध हो जाएगा। अंत मे परमेश्वर ने चाहा तो उपयोगकर्ताओ से अनुरोध है कि यदि आप को अधिक जानकारी अथवा प्रोफ़ेसर की रचनाऔ की या प्रोफ़ेसर से मुलाक़ात की आवश्यकता हो तो निम्नलिखित पते पर संस्था से संपर्क करे हम शीघ्र जवाब देंगे। पता : मकान न. 27, गली न. 19, शहीद फ़ातेमी मार्ग (दौरे शहर) क़ुम ईरान दूरभाष: 0098 251 7735357, 7736390 टेलीग्राफ़: 0098 251 7830570 ई मेल: info@erfan.ir

  • प्रोफ़ेसर हुसैन अनसारीयान का जीवन परिचय

    शताब्दियो (सदियो) से शहर ख़ुनसार ने मानव समाज के लिए बड़े विद्वान, साहित्यिक और कलात्मक एवम स्थिर चेहरो को जन्म दिया है। विद्वान (इल्मि) और मलाकूती चेहरे जैसे स्वर्गीय आयतुल्लाह अलउज़मा आक़ा हुसैन ख़ुनसारी (र.अ.), स्वर्गीय आयतुल्लाह अलउज़मा आक़ा जमाल ख़ुनसारी (र.अ.), स्वर्गीय आयतुल्लाह अलउज़मा आक़ा सैय्यद मुहम्मद तक़ी ख़ुनसारी (र.अ.), स्वर्गीय आयतुल्लाह अलउज़मा आक़ा सैय्यद अहमद ख़ुनसारी (र.अ.), एवम दूसरे हज़ारो विद्वान इरान के इसी शहर से संबंध रख़ते है। विद्वान हुसैन अनसारीयान ने 18 आबान (ईरानी साल का नवां महीना) सन 1323 हि.शम्सी को इसी शहर ख़ुनसार में जन्म लिया। आप के पिता हाज शेख़ के परिवार से थे। यह जाना पहचाना परिवार जिसने इस्लाम धर्म की बहुत ज़्यादा(बहुत अधिक) सेवा की है, इस परिवार में बड़े बड़े विद्वानो ने जन्म लिया जिनमे स्वर्गीय आयतुल्लाह शैख़ मूसा अनसारियान ख़ुनसारी(र.अ.) का इल्मि एवम धार्मिक व्यक्तिकल्ब विशेषज्ञो से ढका छिपा नही है, इसी परीवार से संबंध रख़ते थे। स्वर्गीय इमाम ख़ुमैनी(र.अ.) का कथन हैः कि शियों की फिक़्ह में किताबुस्सलात (यानी नमाज़ के पाठ)में सब से अच्छी किताब आयतुल्लाह अनसारियान(र.अ.) की है उनकी दसियों किताबै मौजूद हैं लेकिन उनमें से एक किताब मुनयातुत्तालिब है जो नजफ के प्रसिद्ध विद्वान (आलिम) आक़ा नाईनी के भाषणों का नोट है जो आप के कठिन परिश्रम का परीणाम है। नजफ़ शहर में आयतुल्लाह इस्फ़हानी के बाद अधिकतर उलमा आप ही को मुजतहिद मानते थे परन्तु आयु ने साथ नही दिया और आयतुल्लाह इस्फ़हानी से पहले ही आप की म्रत्यु हो गई। प्रोफेसर अनसारियान की माता का परिवार, इसी शहर के मुस्तफवी सादात परिवार से संबंधित है आप (प्रोफेसर) के मातृ पूर्वज इस शहर के माने जाने और विश्वासनीय वयक्ति थे अधिकतर देखने में आया कि जब भी नजफ़ या क़ुम्म के विद्वानो (उलमा) में से कोई विद्वान (आलिम) ख़ुनसार शहर आता तो इनके घर ज़रूर आता। प्रोफेसर अपने बचपन का क़िस्सा इस प्रकार बताते है कि जब वह 3 वर्ष के थे तो एक दिन आयतुल्लाह सैय्यद मुहम्मद तक़ी ख़ुनसारी (र.अ.) हमारे पूर्वज (दादा) के घर पधारे, मैने दरवाज़ा खोला और सीधा जाकर आयतुल्लाह की आलिंगन (गोद) मे बैठ गया। मेरे दादा जी के विरोध करने पर उनहोने मना किया और दुलार करते हुए मुझ से प्रश्न किया तुम भविष्य मे क्या बनना चाहते हो? मैने उत्तर दिया आप जैसा बनूगा तो उन्होने मेरे लिए प्रार्थना की। जब कभी भी उस समय, ज्वलन्त (नूरानी) चेहरे और उनकी की हुई प्रार्थना का विचार मेरे मन मे आता है तो मै समझता हूँ कि वह मेरे जीवन का कितना सुन्दर क्षण था। उस्ताद अनसारियान अभी 3 वर्ष के ही थे कि भाग्य से परिवार वाले तेहरान मे स्थानात्रित हो गये और उस शहर के एक धार्मिक महल्ले (ख़ुरासान मार्ग) मे जीवन व्यतीत करने लगे। उस समय आदरणीय आयुल्लाह हाज शेख़ अली अकबर बुरहान (र.अ.)क्षेत्र के इल्नी दात्यिव को पूरा कर रहे थे, उस्ताद ने एसे ही शिक्षक से लाभ उठाया, और सदैव इस बात के प्रचारक है कि आज तक मैने विद्वानो (उलमा) मे से उनके समान किसी को नही देखा। आयतुल्लाह बुरहान एक शिक्षित एवम स्वछंद (ज़ाहिद) मुजतहिद थे उस समय (उन दिनो) वह लुरज़ादेह मस्जिद मे नमाज़ पढाया करते थे। वह विद्वान (आलिम) मस्जिद को इस प्रकार चला रहे थे कि वृद्ध, किशोर एवम बच्चे सभी उसकी ओर खिचे हुऐ थे, इसी प्रकार उन्होने इसी क्षेत्र मे एक धार्मिक पाठशाला खोली जिसमे पहली कक्षा से ही विधार्थी ख़द उन्ही से शिक्षा ग्रहण करते थे। उस्ताद अनसारियान स्वर्गीय बुरहान के बारे मे इस प्रकार कहते है कि मैने उनसे सभाओ और कक्षा मे कई बार सुना है कि वह नही चाहते, कि उनकी मृत्यु तेहरान मे हो और अंतिम संसकार (दफ्न) भी वही पर किया जाये, और सदैव प्रार्थना करते थे यहा तक शबे क़दर (पवित्र रमज़ान मास की विशेष रात्रि) मे भी परमेश्वर से यही प्रार्थना करते थे, परिणाम स्वरूप सन् 1338 (हि. शम्सी) 1959 मे जब मेरी आयु 14 वर्ष से अधिक नही थी, हज की तीर्थ यात्रा मे मरमेश्वर के घर (ख़ानए काबा) के समीप (नज़दीक) उनका निधन हो गया और वही जददा शहर मे हज़रत हव्वा (ईश्वरीय दूत हज़रद आदन की पत्नि) की क़ब्र के समीप उनका अंतिम संसकार किया गया। उस नैतिकता के गुरू (उस्तादे अख़लाक़) के प्रकाशित मुखड़े के दर्शन, एवम उनके जीवन और स्वभाव के तरीक़ो से प्रभावित हुआ जैसा कि आज भी प्रोफेसर अपने ईश्वरीय अध्यापक के रिक्त स्थान को अपने अंदर महसूस करते है। प्रोफेसर अनसारियान बचपन से ही ईश्वरीय चेहरो (जैसे खुनसार शहर के बड़े विदवान आयतुल्लाह सैय्यद मुहम्मद तक़ी ग़ज़नफ़रि {र.अ.})से परिचित थे। दूबारा अपने स्वर्गीय शिक्षक के एक वाक़िया का वर्णन करते हैं कि जो उस्ताद के आत्मिक और बुद्दिमान मनुष्यो के प्रति प्रेम व मुहब्बत को बयान करता हैः शुरु मे जब मे मैं धार्मिक पाठशाला (दीनी मदरसे) में आया और आयतुल्लाह ग़ज़न्फ़री इस से सूचित हुए तो उन्हों ने मेरे धार्मिक विधार्थी होने के संबंध मे मेरी ज़बरदस्त दावत की, जिस मे मेरे पिता के परीवार और महल्ले वालो को भी बुलाया। जवानी मे ज्ञान की वादी मे क़दम रखने के अवसर पर ऐसे धर्मपरायण विद्वान की दावत ने मुझ पर बहुत ही उत्साहवर्धक प्रभाव डाला। धर्मपरायण विद्वान स्वर्गीय ग़ज़नफ़री का जीवन सरल था और शाह के शासन मे कई वर्षो तक ख़ुनसार शहर मे नमाज़े जुमा पढ़ाई। उन देवता सिफ़त चेहरो मे से एक चेहरा स्वर्गीय आयतुल्लाह सैय्यद हुसैन अलवी (र.अ.) का था। स्वर्गीय अलवी ख़ुनसार के प्रसिद्ध मुजतहिदो मे से थे जो ख़ुनसार के ऊचाई के क्षेत्र वाली (उसताद की माता के परिवार के महल्ले की) मस्जिद मे नमाज़ पढ़ाते और शिक्षा देते जिसमे सैकड़ो इस्लामी विधार्थीयो ने आप से शिक्षा ली। जब नजफ़े अशरफ़ (ईराक़ का एक प्रसिद्ध धार्मिक शहर) से शिक्षा हासिल कर ख़ुनसार लौटे तो आपके शिक्षको ने अपने पत्रो मे मुजतहिद लिखा था। फिर प्रोफ़ेसर से उनकी बाते सुनते है: जिस वर्ष मैने क़बा,अमामा पहना और अपने स्वर्गीय नाना सैय्यद मुहम्मद बाक़िर मुस्तफ़वी (र.अ.), नानी और अपने परिवार के लोगो से मिलने ख़ुनसार गया था तो रोड पर मुझ से परिचित किसी व्यक्ति ने देखकर मुझ से कहा: क्या तुम आदरणीय असदुल्लाह की मस्जिद मे 10 रात्रियो तक भाषण दे सकते हो? मैने उत्तर दिया हाँ, जब मै पहले दिन मस्जिद गया तो वहा स्वर्गीय आयतुल्लाह अलवी को बैठा देख कर मुझे आश्चर्य हुआ कि इतने बड़े विद्वान होकर मुझ जैसे का भाषण सुनने आये है, मैने मन मे विचार किया शायद जिसकी मस्जिद है उस से कोई संबंध हो परन्तु मुझे बहुत आश्चर्य हुआ कि वह प्रत्येक 10 भाषण (मजलिस) मे आये मेरे भाषणो मे उनका आना सिर्फ मेरा उत्साह बढ़ाने हेतु होता था। उनही मे से एक आयतुल्लाह हाजी सैय्यद मुहम्मद अली इब्नुर्रेज़ा ख़ुनसारी (दामत बरकातोह) है कि जिनके साथ रिश्तेदारी के नाते प्रोफ़ेसर का बचपने से उनके साथ उठ बैठ थी इस आलिम के प्रति प्रोफ़ेसर इस प्रकार विचार बयान करते है: कि मैने बचपने ही से इब्नुर्रेज़ा ख़ुनसारी (दामत बराकातोह)मे एक चीज़ देखी कि ज्ञान मे आगे समाज मे साहिबे हैसियत है वह मेरे ह्रदय मे बैठ गया, प्रत्येक बृहस्पतिवार को इशा की नमाज़ के पशचात ज़ियारते वारेसा (हज़रत अबाअब्दिल्लाहिल हुसैन {अ.स.}) खड़े खड़े रोते हुए लोगो के लिए पढ़ा करते थे इस विद्वान के हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) से इस प्रकार के संबंध ने मेरे उपर प्रभाव करने के पश्चात मेरे अन्दर नई जान डाल दी। जिन लोगो से प्रोफ़ेसर के गहरे संबंध रहे है उनमे से एक स्वर्गीय इलाही क़ुमशेई (र.अ.) जिनके नैतिकता के पाठयक्रम (दरसे अख़लाक़) से बहुत अधिक सीख मिली है। इन कारको (अवामिल) का संग्रह (परिवारी कारक और नैतिकता के कोच) कारण हुआ के उस्ताद ने हाई स्कूल के पश्चात धार्मिक पढ़ाई के लिए स्वर्गीय इलाही क़ुमशेई (र.अ.) से परार्मश के उपरान्त धार्मीक पाठशाला मे प्रवेश किया। उस्ताद ने तेहरान और क़ुम के दो शिक्षालयो मे शिक्षा ग्रहण की तेहरान मे अरबी ग्रामर पढ़ी ग्रामर ख़त्म करके आयतुल्लाह मिर्ज़ा अली फ़लसफ़ी दामत बरकातोह जो उस समय लुरज़ादेह मस्जिद मे नमाज़ पढ़ाया करते थे उनसे मआलेमुल ओसूल किताब विशेष रूप से पढ़ाने का आग्रह किया ऐसे अनूठे विद्वान (कमनज़ीर आलिम) (कि जिनकी गिनती उन लोगो मे होती है कि जिनके लिए स्वर्गीय आयतुल्लाह अबुल क़ासिम ख़ुई (र.अ.) ने लिखित रूप मे इजतेहाद का दरजा दिया है) ने उस्ताद के निवेदन को स्वीकार कर लिया और आप ने उनके पास लुमआ के दो भाग और मआलिम समाप्त करके आयतुल्लाह फ़लसफ़ी दामत बरकातोह से क़ुम विश्वविघालय (होज़ए इल्मिया क़ुम) जाने की अनुमति मांगी। आयतुल्लाह फ़लसफ़ी ने उत्साह बढ़ाते हुए आप को गले लगाया और जब आपने सदुपदेश देने को कहा तो आयतुल्लाह फ़लसफ़ी ने पवित्र पैग़म्बर रसूले ख़ुदा (स.अ.व.अ.व.)की एक हदीस सुनाई (मन काना लिल्लाहे कानल्लाहो लहू) जो परमेश्वर के काम आऐगा परमेश्वर उसके काम आऐगा, प्रोफ़ेसर अनसारियान कहते है कि उस दिन से आज तक मेरा प्रयास रहा कि उनके आदेश का पालन करूँ और सदैव परमेश्वर के साथ रहूँ और मैने देखा भी कि मेरे पूरे जीवन मे परमेश्वर मेरे साथ है हाँ निश्चित रूप से, जो भी परमेश्वर के साथ रहेगा परमेश्वर भी उसके साथ रहेगा। प्रोफ़ेसर का क़ुम विश्वविघालय (हौज़ए इलमिया क़ुम) मे भी तेहरान की तरह प्रयास रहा कि परमेश्वर के भक्तो के साथ रहै इसीलिए आप स्वर्गीय आयतुल्लाह हाज शेख अब्बास तेहरानी (र.अ.) के पास जाते थे और उनसे सम्पूर्ण लाभ उठाते थे। भाषणो मे खुद उनकी और छात्रो की आँखो से आँसू जारी रहते थे।अंत मे स्वर्गीय आयतुल्लाह हाज अब्बास तेहरानी (र.अ.) के हाथो अमामा क़बा (यह एक प्रकार का विशेष पहनावा है) जैसा रूहानी वस्त्र पहना और अपनी शिक्षा को जारी रखा। रसाइल, मकासिब और केफ़ाया (धार्मिक पुस्तको के नाम) आयतुल्लाह एतेमादी, स्वर्गीय आयतुल्लाह फ़ाज़िल लंकरानी, आयतुल्लाह सालेही नजाफ़ाबादी एवम आयतुल्लाह सानेई जैसे अनमोल विद्वानो से शिक्षा ग्रहण की। इन किताबो की समाप्ती के पश्चात फ़िक़्ह (आदेश) ओसूल (सिध्दांतो) के विषयो मे इजतेहाद (एक डिग्री है) हेतु दर्से ख़ारिज (पाठयक्रम से बाहर, जिसमे आयतुल्लाह किसी मसले मे दूसरे विद्वानो के स्पष्टीकरण पर टिप्पणी करके उसका वर्णन करता है) मे गऐ इस मैदान मे भी स्वर्गीय आयतुल्लाह सैय्यद मुहम्मद मुहक़्क़िक़ दामाद (र.अ.), स्वर्गीय आयतुल्लाह मुनतज़ेरी (र.अ.), स्वर्गीय आयतुल्लाह शेख अबुलफ़ज़्ल नजफ़ी (र.अ.), और विशेष रूप से कई वर्षो तक स्वर्गीय आयतुल्लाह अलउज़मा हाज मिर्ज़ा हाशिम आमुली (र.अ.) जैसे महान धर्म गुरूओ (फ़ुक़्हा) से लाभ उठाया। उस्ताद के उन दिनो के पठन (पढ़ाई) का परिणाम स्वर्गीय आयतुल्लाह अलउज़मा हाज मिर्ज़ा हाशिम आमुली (र.अ.) फ़िक़्ह एवम ओसूल के भाषणो का नोट जिसको आप ने एकत्रित किया है। और दूसरे विषय जैसे हिकमत की आयतुल्लाह गिलानी से और इल्मे मआनी व बयान की तेहरान मे आदरणीय हुज्जतुल इस्लाम वल मुसलेमीन जवादी से शिक्षा ली। वर्णनीय है कि उस्ताद ने इतने प्रयासो के पश्चात स्वर्गीय आयतुल्लह मिलानी (र.आ.), स्वर्गीय आयतुल्लाह अख़ुन्द हमादानी (र.अ.), स्वर्गीय आयतुल्लाह क़ुमरेई (र.अ.), स्वर्गीय आयतुल्लाह अलउज़मा हाज सैय्यद मुहम्मद रज़ा गुलपाएगानी (र.अ.), स्वर्गीय आयतुल्लाह सैय्यद अहमद ख़ुनसारी (र.अ.), स्वर्गीय आयतुल्लाह मरअशी नजफ़ी (र.अ.), और स्वर्गीय आयतुल्लाह अलउज़मा इमाम ख़ुमैनी (र.अ.) जैसे विद्वानो और धर्म गुरूओ से रेवाई आज्ञा पत्र (इजाज़ऐ इजतेहाद) प्राप्त किया। प्रोफ़ेसर ने धर्मशास्त्र और विश्वविधालय (हौज़ए इल्मिया) की अंतिम डिग्रीया प्राप्ति एवम हौज़ए इल्मिया के महान अध्यापको से लाभ उठाने के पश्चात अपने मुख्य उद्देश्य तक पहुचने के लिए जो कि एक धार्मिक छात्र के लिए आवश्यक है वह रिसर्च करना, किताब लिखना और धर्म का प्रचार करना है, हौज़ए इल्मिया क़ुम से लौट आए और आज तक चालीस वर्षो से अधिक, और लगभग तीस हज़ार घंटे देश और विदेश मे भाषणो के माध्यम से अपने दिव्य कर्तव्यो की सेवा कर रहे है। आप के भाषणो की छह (6) हज़ार कैसिटे बिना दोहराए और 80 विषय से अधिक 128 प्रतिया पुस्तके जो प्रोफ़ेसर के विवश होकर तेहरान मे निवास का परीणाम है।

इस्लामी जगत की ख़बरें

नाइजीरिया में बोको हराम का आतंक

यमन में सऊदी अत्याचार और म्यांमार में मुस्लिम नरसंहार पर यमनी महिलाओं का विरोध प्रदर्शन

अफ़ग़ानिस्तान चेक पोस्ट पर तालिबान का हमला

अल-क़ायदा का कमांडर मारा गया

कारगिल में हुआ म्यांमार में हो रही हिंसा के विरुद्ध प्रदर्शन।

हज हर व्यक्ति एवं हर समाज को फ़ायदा पहुँचाता है।

ईरान शहीद मोहसिन हुजजी के शव के स्वागत के लिये तय्यार।

ईरान में हर्षो उल्लास से मनाया गया ईद का पर्व

कंकरीट बंकर लगा कर घेरा शेख़ ईसा क़ासिम का घर।

सरकार हमें सुरक्षा प्रदान नहीं कर सकती तो बता दे, हम अपनी रक्षा स्वंय कर लेंगे।

सऊदी अरब के दोग़लेपन की खुली पोल।

शहीद हुजजी की बीवी ने की पर्दे की गुज़ारिश।

पुरालेख

लेख

इंतेख़ाबे शहादत

आशूरा का रोज़ा

माहे मुहर्रम

पूरी दुनिया में हर्षोल्लास के साथ मनाई गई ईदे ग़दीर।

सब से बड़ा मोजिज़ा

क़ुरआने करीम की तफ़्सीर के ज़वाबित

हज़रत इमाम हसन अलैहिस्सलाम

अमीरुल मोमिनीन अ. स.

इमाम अली (अ) और आयते मुबाहला

** 24 ज़िलहिज्ज - ईद मुबाहिला **

ईदे मुबाहेला के अवसर पर विशेष

क़ुरआन और इल्म

पुरालेख

Mustabser

मौलाना अतहर अब्बास साहब का हार्ट अटैक से निधन।

सीरिया में सऊदी अरब की दम तोड़ती पालीसी।

लंदन की मस्जिद में नमाज़ियों पर जानलेवा हमला।

दुबई पर पड़ सकता है क़तर संकट असर।

दिल्ली में बहरैन सरकार के अपराधों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन।

चीनी मुसलमान, अपने बच्चों के नाम बदलने पर मजबूर।

बहरैन में कफ़न पहन कर लोगों ने किया प्रदर्शन, आयतुल्लाह ईसा क़ासिम की तत्काल रिहाई की मांग।

अमेरिका में इस्लाम का उड़ाया जा रहा है मज़ाक़!!

अमरीका में फैलता इस्लामोफ़ोबिया, भेदभाव में व्यापक स्तर पर वृद्धि।

चीन में दाढ़ी और बुर्क़े पर पाबंदी

बहरैन, शेख़ ईसा क़ासिम के प्रतिनिधि शेख अब्दुल्ला दक़ाक़ की नागरिकता रद्द, दस साल क़ैद की सज़ा।

हैदराबाद में इंटरनेशनल मुस्लिम एकता काँफ़्रेंस। + तस्वीरें

पुरालेख

Masoumeen

हज़रत फ़ातेमा ज़हरा (स) के फ़ज़ायल

इमाम बाक़िर अ.स. अहले सुन्नत की निगाह में

इमाम रज़ा अलैहिस्सलाम के ज़माने के राजनीतिक हालात का वर्णन

शहादते इमाम अली रज़ा अलैहिस्सलाम

इमाम रज़ा अलैहिस्सलाम की शहादत

इमामे रज़ा अलैहिस्सलाम

सूरए आले इमरान की तफसीर

जीवन में प्रगति के लिए इमाम सादिक (अ) की नसीहतें

इमाम हसन (अ) के दान देने और क्षमा करने की कहानी।

रमजान का महत्व।

अली के शियों की विशेषता।

अमीरुल मोमिनीन अली अलैहिस्सलाम का जीवन परिचय

पुरालेख

Family and Its System in Islam

अबुस सना आलूसी

सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह ख़ामेनई का हज संदेश

सूरे अहज़ाब की तफसीर

यमनी सेना के जवाबी हमले में सऊदी हथियारों के भंडार तबाह।

सूरे रअद का की तफसीर 2

हिज़्बुल्लाह की बढ़ती शक्ति और लोकप्रियता से भयभीत अवैध राष्ट्र ।

संतान प्राप्ति हेतु क़ुरआनी दुआ

क़ुरआने मजीद और विज्ञान

बचपन का मोटापा बन सकता है उम्र भर के डिप्रेशन का कारण।

आयतुल्लाह सीस्तानी को मौलाना कल्बे जवाद ने भेजी मुबारकबाद।

यमन में 4 सऊदी और 14 यमनी नागरिकों को मौत की सज़ा।

शबे कद़र के मुखतसर आमाल

पुरालेख